Class 10 Hindi Kshitiz Chapter 5 उत्साह अट नहीं रही है

NCERT Class 10 Hindi Kshitiz is a very important book for the development of skills of students in the Hindi language. In this article, we have guided the Class 10 Hindi Kshitiz Chapter 5 उत्साह अट नहीं रही है with its simplified summary and textbook question answers. ‘उत्साह’ is a Hindi song dedicated to clouds and ‘अट नहीं रही है‘ is a Hindi poem based on the drunkness of nature written by Suryakant Tripathi.

पाठ की रूप रेखा (उत्साह )

सूर्यकांत त्रिपाठी द्वारा लिखित उत्साह एक आह्वान गीत है इसके माध्यम से कवि बादल को संबोधित कर बुलाते हैं| कविता के अनुसार बादल पीड़ित और प्यासे लोगों की अभिलाषा को पूरा करने वाला है और इसके साथ साथ यह नई कल्पना आर नए अंकुर के लिए विप्लव, विध्वंस, और क्रांति चेतना उत्पन्न करने वाला भी है | कविता में क्रांति – चेतना और ललित कल्पना दोनों हैं| इस कविता से कवि निराला जी ने मानव समाज को प्रोत्साहित किया है|

पाठ की रूप रेखा (अट नहीं रही है )

इस कविता में फागुन मास की सुंदरता का मोहक वर्णन किया गया है| फागुन मास की शोभा इतनी अधिक है की सुंदरता से आँखें हट नहीं पा रही है| कहि शीतल मंद हवाएं चल रही है, कहीं आकाश में पक्षी उड़ रहे हैं, कहीं वृक्षों का पौधों पर नए पत्ते व् फूल खिले हैं| फागुन मास की शोभा इतनी अधिक है की वह संसार में समा नहीं पा रही है|

Class 10 Hindi Kshitiz Chapter 5 NCERT Exercise

उत्साह Question Answer

उत्तर- कवि ने बादल से फुहार, रिमझिम या बरसने के लए नहीं कहता बल्कि ‘गरजने’ के लए कहा है; क्योंकि ‘गरजना’ विद्रोह का
प्रतीक है। कवि ने बादल के गरजने के माध्यम से कविता मेंन नूतन विद्रोह का आह्वान किया है।

उत्तर- यह एक आह्वान गीत है। कवि क्रांति लाने के लिए लोगों को उत्साहित करना चाहते हैं। बादल का गरजना लोगों के मन में उत्साह
भर देता है। इस लए कविता का शीर्षक उत्साह रखा गया है।

उत्तर- कविता में बादल वनम्नवलवखत अर्थों की ओर संकेत करता है –

  • जल बरसाने वाली शक्ति है।
  • बादल पीड़ित -प्यासे जन की आकााँक्षा को पूरा करने वाला है।
  • बादल कवि में उत्साह और संघर्ष भर कविता में नया जीवन लाने में सक्रिय है।

रचना और अभिव्यक्ति

उत्तर- कविता की इन पंवियों मेंनाद-सौंदयषमौजदू है –

  • “घेर घेर घोर गगन, धाराधर ओ!
  • ललित ललित, काले घुंघराले ,
    बाल कल्पना के-से पाले
  • “विद्यतु-छवि उर में”

अट नहीं रही है Question Answer

उत्तर- कविता के निम्न्लिखित पंक्तियों को पढ़कर यह धारणा पुष्ट होती है की प्रस्तुत कविता में अन्केतेर्मन के भावो का बाहर की दुनिया से सामंजस्य बिठाया गया –

कहीं सांस लेते हो,
घर घर भर देते हो,
उड़ने को नभ में तुम,
पर पर कर देते हो।

उत्तर- फागनु का मौसम तथा दृश्य अत्यतं मनमोहक होता है। चारों तरफ का दृश्य अत्यंत अत्यंत तथा हरा-भरा दिखाई दे रहा है। पेड़ों पर कहीं हरी तो कही लाल पत्तियां हैं , फूलों की मंद-मंद खुसबू हृदय को मुग्ध कर लेती है। इसलिए कवि की आाँख फागनु की संदरता
से हट नहीं रही है।

उत्तर- प्रस्तुत कविता ‘अट नहीं रही है’ में कवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला ’ जी ने फागनु के सर्वव्यापक सौंदर्य और मादक रूप के
प्रभाव को दर्शाया है। पेड़-पौधे नए-नए पत्तो, फल और फूलों सेअटे पड़े हैं, सुगन्धित हो उठी है, प्रकृवत के कण-कण में सौन्दर्य
भर गया है। खेत-खलिहानों , बाग़-बगीचों, जीव -जन्तुओ, पशु-पक्षियों एवं चौक-चौबारों में फ़ागनु का उल्लास सहज ही दिखता
है।

उत्तर- फागनु में सर्वत्र मादकता छाई रहती है। प्राकृतिक शोभा अपने पूर्ण यौवन पर होती है। पेड़ -पौधें नए पत्ते, फल और फूलों
से लद जाते हैं, हवा सुगन्धित हो उठती है। आकाश साफ-स्वच्छ होता है। पक्षियों के समहू आकाश में विहार करते दिखाई देते हैं।
बाग-बगीचों और पक्षियों में उल्लास भर जाता हैं। इस तरह फागनु का सौन्दर्य बाकी ऋतुओं सेव भिन्न है।

उत्तर- महाकवि सूर्यकांत त्रिपाठी ‘निराला’ जी छायावाद के प्रमुख कवि माने जाते हैं। छायावाद की प्रमुख विशेषताए हैं- प्रकृति चित्रण
और प्राकृतिक उपादानों का मानवीकरण |‘उत्साह’ और ‘अट नहीं रही है’ दोनों ही कविताओं में प्राकृतिक उपादानों का चित्रण
और मानवीकरण हुआ है। काव्य के दो पक्ष हुआ करते हैं- अनुभूति पक्ष और अभिव्यक्ति पक्ष अर्थात भाव पक्ष और शिल्प पक्ष
। इस दृष्टी से दोनों कवितायेँ सराह्य हैं।

छायावाद की अन्य विशेषताए जैसे गेयता , प्रवाहमयता, अलंकार योजना और
संगीतात्मकता आदि भी विद्यमान है। ‘निराला ’ जी की भाषा एक ओर जहााँ संस्कृतनिष्ठ , सामासिक और अलंकारिक है तो वही
दूसरी ओर ठेठ ग्रामीण शब्द का प्रयोग भी पठनीय है। अतुकांत शैली में रचित कविताओं में क्रांति का स्वर्र, मादकता एवं
मोहकता भरी है। भाषा सरल, सहज, सुबोध और प्रवाहमयी है।

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